अब आते हैं प्रबल दावेदारी पर जिसमें धर्मेंद्र प्रधान, सुधांशु त्रिवेदी, भूपेंद्र यादव, संजय जोशी, केशव प्रसाद मौर्य, अन्नामलाई, 33% महिला आरक्षण सिद्ध हेतु कोई महिला या शिवराज सिंह चौहान, सुनील बंसल या सुनील देवधर । इतने नाम और दावेदारी पर इन सब देखने वाली बात है संघ और भाजपा का समन्वय क्या कहता है। सरकार, मंत्रीमंडल चलाने में कोई भूमिका निभा सकता है पर सत्ता पक्ष का राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन और सरकार के बीच समन्वयक का कार्य करेगा। समन्वयक ढूंढना कठिन कार्य नहीं है। जिसने समन्वय का कार्य किया हो या जिसे ऐसा अनुभव हो। ख़ैर! लगातार बैठकों का दौर जारी है और पता नहीं किसकी बारी है...कौन दल के दल दल में धंस जाएगा और कौन कमल बनकर उभरेगा अभी सब अंधकार में है या कहें हुक्मरानों के दिल और दिमाग में है।
भाजपा व्यावहारिक रूप से लोकतांत्रिक दल है और कार्यकर्ताओं को उनकी कौशल, दक्षता के अनुसार दायित्व देने वाला संगठन है। इसकी किसी अन्य दल से कोई तुलना नहीं है यह सत्य है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा में ही संभव है एक चाय बेचने वाला व्यक्ति कार्यकर्ता के रूप में छोटे छोटे दायित्वों को निभाते हुए भारत का प्रधानमंत्री बने। भाजपा में ऐसा केवल एक उदाहरण नहीं है। ऐसे अनेकों सामान्य पृष्ठभूमि से आए हुए कार्यकर्ता हैं जिन्होंने संगठन में रहकर असामान्य कार्य किया है। खैर! इन्हीं सब विशेषताओं के बीच भाजपा को आयु, अनुभव, कार्य दक्षता, कुशलता और कुशल नेतृत्व क्षमता वाला अध्यक्ष रूपी समन्वयक ढूंढ लेना चाहिए या चयनित कर लेना चाहिए। इसमें देरी जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं है।
भाजपा में समन्वय का काम कोई पूर्णकालिक कार्यकर्ता ही करता है।भाजपा में इसके उदाहरण राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के संगठन मंत्री हैं, जो संघ से परामर्श उपरांत ही आते हैं। अब चूंकि सरकार भाजपा की है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में समन्वयक की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जो भारत के ऊर्जावान प्रधानमंत्री जी के साथ मिलकर काम कर सके।
ऐसे में संजय जोशी ऐसा नाम है जो भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रह चुके हैं, लगातार इतने समय से संगठन दायित्व से दूर रहने उपरांत भी एक कार्यकर्ता की तरह भाजपा के लिए काम करते रहे हैं। उनके यहां पहुंचने वाला कार्यकर्ता या कोई भी व्यक्ति समस्या का समाधान पा जाता है, ऐसा उनके विषय में प्रसारित है। संजय जोशी जी और प्रधानमंत्री जी ने मिल कर गुजरात में कमल खिलाया है। ऊर्जा का स्तर और संगठन में काम करने की शैली के कारण दोनों में लय बन सकती है। ये ऊर्जा और कार्य शैली की समानता ही है जो भाजपा को लंबे समय तक सत्ता में बने रहने में मदद करेगी।इसका मतलब ये नहीं है बाकी सभी नामों की कुशलता पर कोई संदेह है पर वरिष्ठता और कार्य कुशलता के क्रम में संजय जोशी जी प्रासंगिक और अग्रणी हैं। इस बात को स्वयं ये दावेदार भी नहीं नकार सकते हैं।
पर सब कयास हैं, भाजपा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अधीन हैं। पर "होइहि सोइ जो राम रचि राखा"... देखने की बात है कि जातिवाद, हिंदूवाद, संगठन, दल, दल दल, लोकतंत्र सभी के बीच समन्वय बनाते हुए का ऊंट किस करवट बैठेगा.....
दीपक शंखधर।